त्रिशंकु पर दातादीन : आलेख (कमलेश पाण्डेय)

(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है ……. ” का चौथा दिन ……… ‘कमलेश पाण्डेय’ का आलेख ) त्रिशंकु अधुनातन और पुरातन के क्षितिजों के बीच लटका एक सुन्दर-सा ग्र... Read More...

हिंदी व्यंग्य की धर्मिक पुस्तक- परसाई: आलेख (प्रेम जनमेजय)

(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है ….. ”  का तीसरा दिन ……..’प्रेम जनमेजय’ का आलेख ) हिंदी व्यंग्य साहित्य में यह निरंतर होता आया है और हो रहा है कि हास... Read More...
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क्या समय है…? परसाई के पुनर्मुल्यांकन का : आलेख (एम्0 एम्0 चंद्रा)

(“हरिशंकर परसाई:–चर्चा ज़ारी है……” के अंतिम और परसाई के जन्म दिन पर…….‘एम० एम० चंद्रा’  का आलेख’) “इस बात को हम अच्छी तरह से जानते है की परसाई अपने यु... Read More...

समलैंगिकः ‘मैं भी हूँ’ : आलेख (अमिता महरौलिया)

साहित्य भी समलैंगिक संबंधो से अछूता नहीं। सर्वप्रथम इस्मत चुगतई ने 1941 में अपनी कहानी ‘लिहाफ’ में समलैंगिकता को रूपांतरित किया था जिसके कारण चुगतई को... Read More...
मुआवज़ा: कहानी (फरीदा ज़माल)

क्यों अखरती हैं मुखर स्त्रियाँ…: आलेख (अनीता मिश्रा)

“शायद दुनिया में अधिकतर जगह ऐसा है कि ज्यादा तर्क – वितर्क करती स्त्री को उस तरह से सम्मान नहीं मिल पाता है जिस तरह पुरुष को मिलता है । ऐसा करने वाला ... Read More...

इंजीनियर्स डे पर कुछ पल का चिंतन: आलेख (विवेक रंजन श्रीवास्तव विनम्र)

भारत रत्न इंजीनियर सर मोक्षगुण्डम विश्वेवश्वरैया के जन्म दिवस ‘इंजीनियर्स डे’ १५ सितम्बर पर मोक्षगुण्डम विश्वेवश्वरैया के सामाजिक जीवन और उनके कार्यों... Read More...
इंतज़ार: कहानी (सुशील कुमार भारद्वाज)

मुस्कुराहट बिखेरने से मिलती है वास्तविक खुशी: आलेख (सुशील कुमार भारद्वाज)

एक इंसान की खुशी दूसरे की भी खुशी हो, कोई जरूरी तो नहीं. जैसे इस दुनियां में सुंदरता और संतुष्टि का कोई निश्चित पैमाना नहीं है ठीक उसी प्रकार खु... Read More...