मरने के अलग-अलग स्टैंडर्ड : व्यंग्य (सुजाता तेवतिया)

जीवन भर पेटभर रोटी नहीं ..... बाद मरने के ख्वाब सुहाने |  बाज़ार के सपनीले सब्जबाग की गांठे खोलने का प्रयास करता 'सुजाता तेवतिया' का व्यंग्य ...... कबी... Read More...

नई थैरेपी…: व्यंग्य (ब्रजेश कानूनगो)

'यह सब आपके  तथाकथित विकास का परिणाम है। विकास के  नाम पर पूरा शहर खोद रखा है।सड़कों पर गड्‌ढे ही गड्‌ढे हैं,पुरानी सड़कों की रिपेयरिंग भी मात्र दिखान... Read More...

क्रांतिकारी की कथा: व्यंग्य (हरिशंकर परसाई)

क्रांतिकारी की कथा ‘क्रांतिकारी’ उसने उपनाम रखा था। खूब पढ़ा-लिखा युवक। स्वस्थ सुंदर। नौकरी भी अच्छी। विद्रोही। मार्क्स-लेनिन के उद्धरण देता, चे ग्वे... Read More...

‘हिंदी हैं हम वतन हैं हिन्दोस्ताँ हमारा’: व्यंग्य (आरिफा एविस)

"हिंदी दिवस" पर विशेष..... 'आरिफा एविस' की हिंदी व्यंग्य रचना..... और क्या बताऊँ  अम्मा!  कालेज पूरा किया तो नौकरी की तलाश शुरू की. नौकरी मिलती कहाँ ... Read More...

भगवान् भरोसे…: व्यंग्य (हनीफ मदार)

किसी भी व्यंग्य रचना की सार्थकता वक्ती तौर पर उसकी प्रासंगिकता में अंतर्निहित होती है | यही कारण है कि हरिशंकर परसाई, शरद जोशी आदि को पढ़ते हुए  हम उसम... Read More...

सूत्रों के हवाले से : व्यंग्य (ब्रजेश कानूनगो)

निरंतर डिजिटल होते समय में वास्तविक और जीवंत जगत स्मृतियाँ बनता जा रहा है, 'सूत्रों' की मानें तो ..... जी हाँ पहले कभी बेताबी से डाकिया बाबू का इंतजार... Read More...

मुल्ला जी की गाय : व्यंग्य (अनीता मिश्रा)

टुन्ना पंडित को ये समस्या राम मंदिर जैसी बड़ी पेचीदा समस्या लगी इसलिए तत्काल एक पुड़िया निकाली.. मुहं में डाल कर बोले..मुल्ला जी समस्या बहुत कठिन है, वो... Read More...

भोलाराम का जीव: व्यंग्य (हरिशंकर परसाई)

यमदूत हाथ जोड़ कर बोला - "दयानिधान, मैं कैसे बतलाऊं कि क्या हो गया. आज तक मैंने धोखा नहीं खाया था, पर भोलाराम का जीव मुझे चकमा दे गया. पाँच दिन पहले ज... Read More...

पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं : व्यंग्य (आरिफा एविस)

सरकार तो आती जाती है आज ये है कल वो थी. लेकिन देश का विकास कभी नहीं रुकता क्योंकि सरकार और कम्पनी में अच्छा गठजोड़ है. ये तो देश की सेवा या लोगों की से... Read More...

अतुल्य भारत की अतुल्य तस्वीर : व्यंग्य (विवेक दत्त मथुरिया)

जब कोई शख्य किसी भी अतुल्यता के अतुल्य सच को कहने की जुर्रत करता है तो अतुल्य सहिष्णुता अतुल्य असहिष्णुता में तब्दील हो जाती है। अगर आज कबीर दास कुछ क... Read More...