दुलारी बाई @ एमए इन हिंदी: व्यंग्य (डॉ० कर्मानंद आर्य)

"फारवर्ड ब्लाक आजकल एक दूसरे का कान फोड़ रहे हैं. गरिया रहे हैं अपने पूर्वजों को. सालों और बनो प्रगतिशील और भला करो मनुष्यों का. आदमी को आदमी समझो बहुत... Read More...

डकार की दरकार: व्यंग्य (डॉ० कर्मानंद आर्य)

‘डकार’ पर जांच कराना टेढ़ी खीर है. जांच का शिरा हर सरकार से जुड़ता है इसलिए ‘सरकार’ इससे बच रही है. इतिहास कहता है कि एक विशाल प्रदेश का मुख्यमंत्री भी ... Read More...

एक गौभक्त से भेंट: व्यंग्य (हरिशंकर परसाई)

हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य जगत का एक ऐसा नाम जिसकी वज़ह से व्यंग्य को साहित्य विधा की पहचान मिली | परसाई ने सामाजिक रूप से हलके फुल्के मनोरंजन की सांस... Read More...

बेवकूफी का तमाशा : व्यंग्य, आरिफा एविस

'अरे जमूरे ! आजकल के बुद्धिजीवी और लेखक भी तो लोगों का अप्रैल फूल बनाते हैं. ऐसे मुद्दों पर लिखते और ऐसे विषयों पर चर्चा करते हैं जिसका अवाम से कुछ भी... Read More...

घंटा बुद्धिजीवी : व्यंग्य (अनीता मिश्रा )

"अगर कोई स्त्री इन्हें गलती से भी पोजिटिव रिस्पोंस दे देती है तो इनके मन में मंदिर की सामूहिक आरती के समय बजने वाले हजारों घंटे बजने लगते हैं . ये उसक... Read More...

धन कभी काला होता है क्या ? व्यंग्य (नित्यानंद गायेन)

धन कभी काला होता है क्या ?  नित्यानंद गायेन पिछले कई दिनों से मैं अपनी प्रेमिका से दूर होने के गम में एकदम देवदास बना हुआ था | ऊपर से ये बेईमान मौस... Read More...

हंगामे का संस्कार : व्यंग्य (ब्रजेश कानूनगो)

‘इस बार क्यों, सदन का चलना तो हर बार ही मुश्किल होता है. जब ये सत्ता में थे तब भी विपक्ष ने चलने नहीं दिया था. अब ये विपक्ष में हैं तो भी यही होगा, कौ... Read More...

सोशल मीडिया के ‘जीजा जी’: व्यंग्य (अनीता मिश्रा)

"इन जीजाओं की किस्मत उस वक़्त खुल जाती है जब इन्हें कोई इनके जैसी मजेदार साली मिल जाती है. मसलन जीजा ने लिखा ‘बहुत शनदार’ तो साली साहिबा एक आँख बंद वाल... Read More...

मन की व्यथा कथा: व्यंग्य (नित्यानंद गायेन)

मन की व्यथा कथा  नित्यानंद गायेन योग करने के तुरंत बाद ही इन्द्र, मौनेंद्र से मिले | योग को इतना बड़ा इवेंट बनाने के लिए उन्हें बधाई दी और उसी क्षण ... Read More...

बारिश में दिल्ली: व्यंग्य (नित्यानन्द गायेन)

कविता की दुनिया में अपनी ख़ास पहचान रखने वाले कलमकार की कलम से निकले व्यंग्य को पढ़ते हुए व्यंग्य में भी एक कवि की उपस्थिति का एहसास तो जरूर होता है लेक... Read More...