संत कबीर और आधुनिक हिन्दी काव्य: शोध आलेख (प्रमिला देवी)

'जननायक कबीर का प्रभाव साहित्य पर आज छह सौ वर्षो के बाद भी ज्यों का त्यों देखा जा सकता है । आज जब भी धरती के किसी कोने में मानवता लहूलुहान होती है, तो... Read More...

कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास: ‘छटवीं और अंतिम क़िस्त’ (अशोक कुमार पाण्डेय)

कश्मीर के ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों से शोध-दृष्टि के साथ गुज़रते हुए “अशोक कुमार पाण्डेय”  द्वारा लिखा गया ‘कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास’ आलेख की... Read More...

कबीर गायन की विविध शैलियाँ और उसकी संप्रेषणीयता: आलेख (रोहित कुमार)

कबीर को ज़्यादातर मालवा में ही गाया जाता है। कुमार गंधर्व एकमात्र ऐसे संगीतज्ञ हुए हैं जिन्होंने मालवांचल की बोली मालवी और उसके लोकगीतों को बंदिशों का ... Read More...

कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास: ‘पाँचवीं क़िस्त’ (अशोक कुमार पाण्डेय)

कश्मीर के ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों से शोध-दृष्टि के साथ गुज़रते हुए “अशोक कुमार पाण्डेय”  द्वारा लिखा गया ‘कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास’ आलेख की... Read More...

कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास: ‘चौथी क़िस्त’ (अशोक कुमार पाण्डेय)

कश्मीर के ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों से शोध-दृष्टि के साथ गुज़रते हुए “अशोक कुमार पाण्डेय”  द्वारा लिखा गया ‘कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास’ आलेख की... Read More...

हिंदी-उर्दू द्वंद्व और टोपी शुक्ला: आलेख (मोहम्मद हुसैन डायर)

राही मासूम रज़ा की कृतियों के पात्र भाषायी द्वंद्व से जूझते देखे जा सकते हैं। आधा गांव जहां उर्दू और आंचलिक भाषा  में उलझा हुआ है, वहीं टोपी शुक्ला हिं... Read More...

कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास: ‘तीसरी क़िस्त’ (अशोक कुमार पाण्डेय)

कश्मीर के ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों से शोध-दृष्टि के साथ गुज़रते हुए “अशोक कुमार पाण्डेय”  द्वारा लिखा गया ‘कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास’ आलेख की... Read More...

कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास: ‘दूसरी क़िस्त’ (अशोक कुमार पाण्डेय)

कश्मीर के ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों से शोध-दृष्टि के साथ गुज़रते हुए “अशोक कुमार पाण्डेय”  द्वारा लिखा गया ‘कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास’ आलेख की... Read More...

कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास: ‘पहली क़िस्त’ (अशोक कुमार पाण्डेय)

यूं तो कोई भी इतिहास सत्ता लौलुपताओं से उत्पन्न, वर्गीय संघर्षों से रक्त-रंजित, मानवीय त्रासदियों के बड़े दस्तावेज के रूप में ही मिलता है |  कुछ इतिहास... Read More...

सामाजिक परिवर्तन के अंतर्द्वंदऔर आधा गाँव: शोध आलेख

प्रयोगधर्मी साहित्यकार राही मासूम रजा़ ने अपनी लेखनी द्वारा बदलते सामाजिक परिवेश को बहुत ही सूक्ष्मता से शब्दबद्ध किया है। आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व सन्... Read More...