‘न्यूटन’ फिल्म नहीं एक विचार प्रक्रिया… : फिल्म समीक्षा (नवलकिशोर व्यास)

चुनाव को हम सभी ने बुलेट और बटन तक सीमित कर दिया है। पिछले कुछ समय में बड़े शहरों में वोट कास्टिंग बढ़ी है पर भारत केवल दिल्ली-मुम्बई-बेंगलोर नही है। ठे... Read More...

कट्टी बट्टी का फ्लॉप शो : फिल्म समीक्षा (संध्या नवोदिता)

कट्टी बट्टी का फ्लॉप शो संध्या नवोदिता कट्टी बट्टी का बहुत इंतज़ार था. इधर कंगना रानौत ने फैशन, क्वीन, तनु वेड्स मनु, फिर तनु मनु पार्ट दो से उम्मीद... Read More...

डेमोक्रेसी का खुरदुरा आख्‍यान, ‘न्यूटन’ फिल्म समीक्षा

अमित वी मासुरकर और मयंक तिवारी की तारीफ बनती है कि वे बगैर किसी लाग-लपेट के जटिल राजनीतिक कहानी रचते हैं। वे उन्‍हें दुर्गम इलाके में ले जाते हैं। इस ... Read More...

राजा रवि वर्मा: दो फ़िल्में, दो नजरिए : फिल्म समीक्षा (प्रो० विजय शर्मा)

"जब कलाकार और उसकी कृतियों की कहानी किसी दूसरे कैनवस पर उकेरी जाती है तो वहाँ बहुत कुछ बदल जाती है। सच्चाई और कल्पना का मिश्रण एक नई कृति रचता है। यही... Read More...

समाज की तृष्णा अनदेखी रह गई.. : फिल्म समीक्षा (सैयद एस तौहीद)

समाज की तृष्णा अनदेखी रह गई..  एस तौहीद शहबाज़ प्रेम रतन की परिभाषा एवम दायरा इतना अधिक सीमित नही होना चाहिए जितना कि हालिया रीलिज 'प्रेम रतन धन पाय... Read More...

प्रेमचंद और सिनेमा: आलेख (प्रो०विजय शर्मा)

प्रेमचंद के १३७ वें जन्मदिवस पर विशेष - (यह सिनेमा का शुरुआती दौर था। प्रेमचंद की निगाह इस विधा पर थी। तीस के दशक में उन्होंने सिनेमा पर अपनी चिंताओं... Read More...

परसाई की प्रासंगिकता और जाने भी दो यारो: आलेख (‘प्रो0 विजय शर्मा’)

"हमारा देश अजीब प्रगति के पथ पर है। मूल्य से मूल्यहीनता और आदर्श से स्वार्थपरता की ओर, नैतिकता से अनैतिकता की ओर बड़ी तेजी से दौड़ लगा रहा है। परसाई की ... Read More...

यादों में ‘राजकपूर’ छलिया के बहाने: आलेख (एस तौहीद शहबाज़)

'राजकपूर' के जन्मदिवस पर फिल्म 'छलिया' के संदर्भों में फिल्म की सामाजिक और मनोरंजक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए राजकपूर की भूमिका को याद कर रहे हैं ... Read More...

क्लासिकल फिल्मों का समागम : पटना फिल्म फेस्टिवल 2016: रिपोर्ट

लेकिन लंबे अरसे बाद शुरू हुए इस फिल्म समारोह की सबसे अच्छी बात यह रही कि भारतीय पैनोरमा की आठ भाषाओं की स्तरीय एवं क्लासिकल फिल्मों को देखने के लिए कि... Read More...

रफ़ी साहेब की दीवानगी: आलेख (सैयद एस तौहीद )

'रफ़ी साहेब को पहला फिल्मी ब्रेक श्याम सुंदर ने एक पंजाबी फ़िल्म मे दिया, फ़िर जी एम दुर्रानी की फ़िल्म में पहले हिन्दी गीत के लिए नौशाद ने पहल की. उस जमा... Read More...