समाज की तृष्णा अनदेखी रह गई.. : फिल्म समीक्षा (सैयद एस तौहीद)

समाज की तृष्णा अनदेखी रह गई..  एस तौहीद शहबाज़ प्रेम रतन की परिभाषा एवम दायरा इतना अधिक सीमित नही होना चाहिए जितना कि हालिया रीलिज 'प्रेम रतन धन पाय... Read More...

प्रेमचंद और सिनेमा: आलेख (प्रो०विजय शर्मा)

प्रेमचंद के १३७ वें जन्मदिवस पर विशेष - (यह सिनेमा का शुरुआती दौर था। प्रेमचंद की निगाह इस विधा पर थी। तीस के दशक में उन्होंने सिनेमा पर अपनी चिंताओं... Read More...

परसाई की प्रासंगिकता और जाने भी दो यारो: आलेख (‘प्रो0 विजय शर्मा’)

"हमारा देश अजीब प्रगति के पथ पर है। मूल्य से मूल्यहीनता और आदर्श से स्वार्थपरता की ओर, नैतिकता से अनैतिकता की ओर बड़ी तेजी से दौड़ लगा रहा है। परसाई की ... Read More...

यादों में ‘राजकपूर’ छलिया के बहाने: आलेख (एस तौहीद शहबाज़)

'राजकपूर' के जन्मदिवस पर फिल्म 'छलिया' के संदर्भों में फिल्म की सामाजिक और मनोरंजक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए राजकपूर की भूमिका को याद कर रहे हैं ... Read More...

क्लासिकल फिल्मों का समागम : पटना फिल्म फेस्टिवल 2016: रिपोर्ट

लेकिन लंबे अरसे बाद शुरू हुए इस फिल्म समारोह की सबसे अच्छी बात यह रही कि भारतीय पैनोरमा की आठ भाषाओं की स्तरीय एवं क्लासिकल फिल्मों को देखने के लिए कि... Read More...

रफ़ी साहेब की दीवानगी: आलेख (सैयद एस तौहीद )

'रफ़ी साहेब को पहला फिल्मी ब्रेक श्याम सुंदर ने एक पंजाबी फ़िल्म मे दिया, फ़िर जी एम दुर्रानी की फ़िल्म में पहले हिन्दी गीत के लिए नौशाद ने पहल की. उस जमा... Read More...

अनारकली ऑफ आरा : उम्मीद अभी जिंदा है: फिल्म समीक्षा (मज्कूर आलम)

स्त्री सशक्तीकरण पर जब भी बातें होती है तो वह किताबी जुमले का शक्ल अख्तियार कर लेती है। बहस की भाषा क्लासिकी लिए होती है और वह पूरी तरह से बौद्धिक कवा... Read More...

जिंदा रहना हर आदमी का अधिकार है: आलेख (एस तौहीद शाहवाज़)

"देश की एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी काट रही, फुटपाथ के लोगों की तक़दीर पहले से कोई बहुत ज्यादा नहीं बदली। हाशिए के लोगों के हांथ अब भी खाली... Read More...

सेक्सुअल शोषण की काली हकीक़त, ‘कहानी २’ आलेख (सैयद एस तौहीद)

सेक्सुअल शोषण की काली हकीक़त, 'कहानी २'  एस तौहीद शहबाज़ शोषण के हर रुप का विरोध ज़रूरी है. यह किसी भी रुप में मौजूद हो सकता है.सुजॉय घोष की हालिया '... Read More...

आईए ‘नक्शाब जारचवी’ को जाने : आलेख (सैयद एस तौहीद)

आज फिल्मउद्योग में बाजारी प्रभाव और नित नए उगते चहरों कि भीड़ में गुम होते और हो चुके कई नामों में शामिल है बुलंद शहर में जन्मे  गीतकार  'नक्शाब जारचवी... Read More...