हावर्ड फास्ट एवं ख्वाजा अहमद अब्बास ने अपनी रचनाओं में हमेशा समाजवादी दृष्किोण को आगे बढ़ाया: रिपोर्ट (अनीश अंकुर)

हावर्डफ़ास्ट और ख्वाजा अहमद अब्बास जन्म्शाताव्दी वर्ष के अवसर पर "साहित्य- सिनेमा - प्रगतिशील सांस्कृतिक आन्दोलन" विषय पर पटना में आयोजित एक परिचर्चा की संक्षिप्त रिपोर्ट, "अनीश अंकुर" की कलम से ....| - संपादक  ... Read More...

मुक्तिबोध, संघर्ष और रचनाशीलता : अनीश अंकुर

प्रख्यात कवि आलोकधन्वा ने हरिशंकर परसाई के साथ के अपने संस्मरणों को सुनाते हुए कहा " एक बार मैंने हरिशंकर परसाई से पूछा कि आप सबसे अधिक प्रभावित किससे हुए तो उन्होंने कहा 'मुक्तिबोध'। मुक्तिबोध एक लाइट हाउस जी ... Read More...

एक्टीविस्ट वैज्ञानिक थे प्रो0 यशपाल : अनीश अंकुर

 श्रद्धांजलि सभा  आयोजन  एक्टीविस्ट वैज्ञानिक थे प्रो यशपाल " प्रोo यशपाल इस बात की चिंता करते थे कि भारत की जनता और विज्ञान को कैसे जोड़ा जाए और इस प्रक्रिया में ' भारत ज्ञान-विज्ञान समिति ' उभर कर आया। वे आय... Read More...

शेक्सपीयर मन के रचनाकार हैं: एक रिपोर्ट, (राजन कुमार सिंह)

शेक्सपियर ऐसे नाटककार थे जिन्हें आलोचकों ने भी माना कि वो वाकई में महान थे। अदृश्य को जानने की शक्ति कलाकार को महान बनाती है। वे अपने नाटकों के चरित्र खुद जीते थे। प्रकृति के प्रांगण में उन्होंने सीखा, उनके पास... Read More...

वो हत्या जिसने सोवियत संघ को हिला दिया : समीक्षा (अनीश अंकुर)

सर्गेई मिसनोविज किरोव का हत्यारा निकोलायेव एक अकेला इंसान था। किरोव की हत्या के पीछे साजिश न थी, कोई गुप्त आतंकवादी नेटवर्क सक्रिय नहीं था, जैसा कि तीस के दशक समझा जा रहा था। तीनों इस राय से एकमत हैं कि स्टालिन... Read More...

शम्भू मित्र ने रंगमंच में आधुनिक युग का प्रारंभ किया, अनीश अंकुर

शम्भू मित्र ने रंगमंच में आधुनिक युग का प्रारंभ किया अनीश अंकुर "शम्भू मित्र ने आम लोगों के दुःख-दर्द को तो अभियक्त किया ही लेकिन उनके द्वारा निर्देशित 'नवान्न' ने नाटकों की दुनिया में नए युग का पदार्पण किया... Read More...

भिखारी ठाकुर, उत्सुकता की अगली सीढ़ी: आलेख (अनीश अंकुर)

बिहार के सांस्कृतिक निर्माताओं में गौरवस्तंभ माने जाने वाले 'भिखारी ठाकुर' पर पिछले कुछ वर्षों कई पुस्तकें निकलीं, शोध हुए एवं कई अभी भी जारी है।  इसी कड़ी में ‘विकल्प प्रकाशन’, नई दिल्ली से अश्विनी कुमार पंकज ... Read More...

सांस्कृतिक मसलों पर राजनीतिक पक्षधरता: आलेख (अनीश अंकुर)

विश्वविख्यात सांस्कृतिक चिंतक अर्डाेनो कहते हैं ‘‘ संस्कृति के सवाल अंततः प्रशासनिक प्रश्न होते हैं ।’’ खास सियासी पक्षधरता वाले संस्कृतिकर्मी अपनी राजनीति छुपाने के लिए संस्कृति को एक राजनीतिनिरपेक्ष श्रेणी बत... Read More...

जो है, उससे बेहतर चाहिए का नाम है ‘विकास’ : आलेख (अनीश अंकुर)

भगत सिंह या सफ़दर हाशमी के जाने के बाद सांस्कृतिक या वैचारिक परिक्षेत्र या आन्दोलन रिक्त या विलुप्त हो गया ....या हो जाएगा यह मान लेना निश्चित ही भ्रामक है बल्कि सच तो यह है कि उनकी परम्परा के प्रतिबद्ध संवाहक ह... Read More...

रंगमंच में अनुदान का ऑडिट कराया जाए : आलेख (अनीश अंकुर)

‘‘थियेटर में ग्रांट देने का काम एन.एस.डी को सौंप दिया गया है। बहुत सारे लोग परेशान हैं कि अब तो सारा अनुदान एन.एस.डी के लोगों को ही मिलने वाला है,.... उनकी चिंता जायज है। पीछे के आंकड़ों और रंगमहोत्सव इसका जीता-... Read More...