अमृतसर टू कनेडा : लघुकहानी (अमिता महरौलिया)

‘‘मुंडा सिंगापुर दा है ओथे ही एक छोटा जिहालया होया है। मुंडा जाट्ट है, मैं देख लिया है तुसी बस हां करो जी!’’ मनप्रीत लस्सी का गिलास रखते बोली... ‘‘जी गीत ता एकदम गां वरगी है। बस तुसी भी हां करो जी।’’ ...अरे भ... Read More...

समलैंगिकः ‘मैं भी हूँ’ : आलेख (अमिता महरौलिया)

साहित्य भी समलैंगिक संबंधो से अछूता नहीं। सर्वप्रथम इस्मत चुगतई ने 1941 में अपनी कहानी ‘लिहाफ’ में समलैंगिकता को रूपांतरित किया था जिसके कारण चुगतई को समाज तथा कई संस्थाओ की आलोचना का शिकार होना पड़ा था। इसके त... Read More...