वो औरत : कविता (अशोक तिवारी)

स्त्री जीवन के क्षणिक, स्थाई, सामाजिक, राजनैतिक, पारिवारिक विभिन्न रूप स्वरूप, कुंठा अवसाद प्रेम आलाप के आरोह अवरोह से गुजरते हुए उसके अनेक पहलुओं का रचनात्मक विश्लेष्ण करती अशोक तिवारी की एक लम्बी कविता....| -... Read More...

वो हाथ…एवं अन्य कविताएँ (अशोक तिवारी)

इंसान होने के एहसासात के साथ संवेदनाओं को छूती हुई अशोक तिवारी  कविताएँ ......... संपादक  वो हाथ... अशोक कुमार तिवारी काम करते वो हाथ जो हों किसी भी देश में किसी भी मिट्टी से जुड़े हों उनके सरोकार जो र... Read More...