‘अश्विनी आश्विन’ की ग़ज़लें

शांत पानी में फैंका गया  पत्थर, जो पानी के ऊपर मजबूती से जम रही काई को तोड़ कर पानी की सतह तक जाकर उसमें हलचल पैदा कर देता है ...... अश्विनी आश्विन की ग़ज़लें मस्तिष्क से होकर ह्रदय तक पहुंचकर उसी पानी की तरह विचल... Read More...

‘अश्विनी आश्विन’ की तीन ग़ज़लें

'अश्विनी आश्विन' की तीन ग़ज़लें  अश्विनी आश्विन 1-  जो भरे-बाज़ार, सब के बीच, नंगा हो गया। वो सियासतदां, शहर का फिर मसीहा हो गया।। फिर चले चाकू-छुरे कल, फिर जलीं कुछ बस्तियां, हो गई काशी खफा, नाराज़ कावा ह... Read More...