सुखिया मर गया भूख से: नाटक (राजेश कुमार)

बेहद प्रासंगिक नाटक 'सुखिया मर गया भूख से' के पूर्ण नाट्यालेख को हमरंग पर प्रकाशित करने का उद्देश्य  देश भर के नाट्यकर्मियों को इस नाटक की सहज उपलब्धता है | बावजूद इसके मंचन से पूर्व लेखकीय अनुमति लेना नैतिक जि... Read More...

आत्महत्या: कविता (नित्यानंद गायेन)

(कभी-कभी अचानक कोई कविता मन-मस्तिष्क में यूं पेवस्त होती है कि बहुत देर तक थरथराता रहता है तन-मन...नित्यानद गायेन ने आत्महत्या जैसे विषय पर भावपूर्ण कविता लिखी है...संपादक) आत्महत्या आत्महत्या पर लिखी गयी ... Read More...
(हनीफ मदार)

पुस्तक मेले से लौटकर…: संपादकीय (हनीफ मदार)

पुस्तक मेले से लौटकर...  हनीफ मदार एक दिन कटता है तो लगता है एक साल कट गया | भले ही यह एक किम्बदंती ही सही लेकिन वर्तमान में सच साबित हो रही है | आधुनिकता के साथ समय जिस तेज गति से आगे बढ़ रहा है उस गति से आध... Read More...