उम्मीद ही तोड़ती है आदमी को हर बार: कविताएँ (नित्यानंद गायेन)

समय के बीच मानव मन की व्याकुल रिक्तता को विवेचित करतीं 'नित्यानंद गायेन' की समय सापेक्ष रचनाएँ .....|  उम्मीद ही तोड़ती है आदमी को हर बार  नित्यानंद गायेन मिटा दिया जाऊंगा एक दिन तुम्हारी डायरी के उस पन... Read More...

जिंदा रहना हर आदमी का अधिकार है: आलेख (एस तौहीद शाहवाज़)

"देश की एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी काट रही, फुटपाथ के लोगों की तक़दीर पहले से कोई बहुत ज्यादा नहीं बदली। हाशिए के लोगों के हांथ अब भी खाली हैं । महंगाई, भ्रष्टाचार व कालाबाजार का ताप सबसे ज्यादा निच... Read More...

मेरा शहर भोपाल एवं अन्य कवितायेँ : शहनाज़ इमरानी

गहरे प्रतीक संदर्भों में वर्तमान सामाजिक हालात और राजनैतिक व्यवस्था के बनते कथित तांबई परिदृश्य के बीच से बारीक पड़ताल के साथ आम जन और मानव जाति व् उसकी मनः स्थिति को तलाशने का प्रयास करती 'शहनाज़ इमरानी' की यह क... Read More...