साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग २” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"आधुनिक ज्ञान एक शक्ति है। उससे लैस होकर पुरुष खुद को शक्तिशाली बनाना चाहते थे, और स्त्रियों को कमज़ोर ही रखना चाहते थे। अपने इस स्वार्थ को पुरुष सुधारकों ने राष्ट्रवाद के सिद्धांत के आवरण में पेश किया कि ब्रिटि... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग ३” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध और बीसवीं सदी के पूर्वाद्ध की अवधि में जिन भारतीय महिलाओं ने अपनी मेधा, विद्वत्ता और सामाजिक क्षेत्र में आंदोलनकारी व्यक्तित्व से समाज के बड़े हिस्से को प्रभावित किया तथा स्त्री स्वात... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ :आलेख (नमिता सिंह)

"स्त्री शिक्षा के लिये समर्पित रुकैया सखावत हुसैन का साहित्य में भी बड़ा योगदान है। वे उन प्रारंभिक महिलाओं में हैं जिन्होंने स्त्री विरोधी सामाजिक और धार्मिक रूढ़ियों के विरुद्ध तर्कपूर्ण ढंग से लिखा और साथ ही स... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ : आलेख (नमिता सिंह)

इक्कीसवीं सदी में हम स्त्रियाँ जिन्होंने स्वतंत्रता, समानता और विकास के अधिकार प्राप्त कर सृजन क्षेत्र में और समाज में अपने लिये स्थान बनाया, परंपरा जनित परिवार अथवा व्यवस्था जनित समाज के स्तर पर होने वाले अन्य... Read More...

क्या समय है…? परसाई के पुनर्मुल्यांकन का: आलेख (एम० एम० चंद्रा)

"इस बात को हम अच्छी तरह से जानते है की परसाई अपने युगबोध को साथ लेकर चल रहे थे. जब हम परसाई का मूल्यांकन करेंगे तो हमें वामपंथ के वैचारिक पक्ष पर भी बात करनी पड़ेगी, पार्टी संगठन और अपनी आलोचना और आत्मालोचना से ... Read More...

अहिष्णुता के अनेक चेहरे हैं : आलेख (नमिता सिंह)

उन्नीसवीं शताब्दी में शुरू हुए समाज सुधार आंदोलनों से जुड़ी विभूतियों को भी कम संकटों का सामना करना नहीं पड़ा। सती प्रथा के विरोध में आन्दोलनरत राजा राममोहन राय को अपने परिवार का त्याग करना पड़ा। उनके सहयोगियों ने... Read More...

कबीर गायन की विविध शैलियाँ और उसकी संप्रेषणीयता: आलेख (रोहित कुमार)

कबीर को ज़्यादातर मालवा में ही गाया जाता है। कुमार गंधर्व एकमात्र ऐसे संगीतज्ञ हुए हैं जिन्होंने मालवांचल की बोली मालवी और उसके लोकगीतों को बंदिशों का स्वरूप दिया. उत्तरप्रदेश की अवधि का असर तो कई उत्तर भारतीय स... Read More...

हिंदी-उर्दू द्वंद्व और टोपी शुक्ला: आलेख (मोहम्मद हुसैन डायर)

राही मासूम रज़ा की कृतियों के पात्र भाषायी द्वंद्व से जूझते देखे जा सकते हैं। आधा गांव जहां उर्दू और आंचलिक भाषा  में उलझा हुआ है, वहीं टोपी शुक्ला हिंदी उर्दू विवाद पर लंबी बहस कर पाठकों को झकझोर देने वाले संवा... Read More...

कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास: ‘दूसरी क़िस्त’ (अशोक कुमार पाण्डेय)

कश्मीर के ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों से शोध-दृष्टि के साथ गुज़रते हुए “अशोक कुमार पाण्डेय”  द्वारा लिखा गया ‘कश्मीर : एक संक्षिप्त इतिहास’ आलेख की दूसरी क़िस्त आज पढ़ते हैं | – संपादक  "1128 ईसवी में गद्दीनश... Read More...

आखिर युद्ध की परिणति…? आलेख (रामजी तिवारी)

फ्रेंच राष्ट्रपति ‘ओलांद’ के इस वक्तव्य का क्या अर्थ है कि “अब हम दयारहित आक्रमण करेंगे |” क्या उस दयारहित आक्रमण का निशाना सिर्फ आइएसआइएस पर ही होगा, या कि उस इलाके की सामान्य जनता पर भी | या कि ‘कोलैट्रेल डैम... Read More...