समकालीन हिंदी उपन्यास और आदिवासी जीवन: आलेख (कृष्ण कुमार)

21वीं सदी में जब भूमण्डलीकरण, औद्योगीकरण अपने चरम पर है तथा विकास के नाम पर आदिवासी समुदाय को उसके मूलभूत आवश्यकताओं जल, जंगल, जमीन’ से बेदखल किया जा रहा ऐसे में संकट केवल उनके अस्तित्व पर ही नहीं उनकी संस्कृति... Read More...