जो डूबा सो हुआ पार…: आलेख (अनीता मिश्रा)

''क़ैद बन जाए मुहब्बत तो मुहब्बत से निकल'', या ''ज़न्नत एक और हैं, जो मर्द के पहलू में नहीं..'' आमतौर पर लोग प्रेम के मायने बंधना या बांधना समझते हैं। लेकिन एक स्त्री और पुरुष के बीच का प्रेम फैसला लेने की एक आज... Read More...

इश्क़ वाला दिन: एवं अन्य कवितायेँ (सीमा आरिफ)

बाज़ारी प्रोपेगंडों से दूर इंसानी ह्रदय में स्पंदन करतीं मानवीय संवेदनाओं में प्रेम की तलाश करतीं 'सीमा आरिफ' की कवितायेँ .. इश्क़ वाला दिन इस मुहब्बत के दिन मैंने यह कविता तुम्हारे वास्ते भीड़ से खचाखच भरी ब... Read More...