उपेन्द्र परवाज़: की ग़ज़ल….

उपेन्द्र परवाज़: की ग़ज़ल.... १-   उपेन्द्र परवाज़ आँख के मौसम जो बरसे, ज़िस्म पत्थर हो गये अब के सावन बारिशों से, बादल ही तर हो गये | इस कदर थे मोजज़े, अपने जुनूने इश्क के क़त्ल करने के बाद, खुद घायल ... Read More...