जन-गण-मन एवं अन्य कवितायें, स्मरण शेष (रमाशंकर यादव ‘विद्रोही)

3 जनवरी 1957 को फिरोज़पुर (सुल्तानपुर) उत्तरप्रदेश में जन्मे, रमाशंकर यादव 'विद्रोही' हमारे बीच नहीं रहे ... जैसे जे एन यू खाली हो गया है... जैसे फक्कड़ बादशाहों की दिल्ली खाली हो गयी है !! उनका बेपरवाह अंदाज़, फ... Read More...

औरतें नहीं देखती आईना: कविताएँ (रुची भल्ला)

स्त्री-विमर्श और कविता में नये मुहावरों से लैस भाषा-शिल्प...रूचि भल्ला बड़ी ज़िम्मेदारी से अपने समय और समाज का सच बयान करती हैं...संपादक औरतें नहीं देखती आईना   रूचि भल्ला औरतें नहीं देखती हैं आईना वो तो श... Read More...