‘निलय उपाध्याय’ की दो कवितायेँ

कबीर नगर   तुम्हारा नगर तो अजीब है कबीर सच कहूं तो अदभुत, क्या तुम्हे पता था इसीलिए रच दिए एक साथ दो दो प्रतीक और किया उलटवासियों का विधान सच कहता हूं मजा आ गया उलट बांसिया उलट रही है ,पुलट रही है ... Read More...