बीस सौ इक्यावन का एक दिन: कहानी (नमिता सिंह)

"मित्र ने बताया कि हिंदुस्तान के विदेशी मित्रों ने देश को लबालब आर्थिक सहायता इस शर्त पर दी थी कि देश से गरीबी हटा दी जाएगी। मित्र राष्ट्रों से पर्यटक आते तो उन्हें गरीबी और भुखमरी को देखकर अच्छा नहीं लगता था। ... Read More...

श्रृंखला : कहानी (अखिलेश)

चिट्ठी, वजूद, श्रृंखला, सोने का चाकू, हाकिम कथा, जैसी कालजयी कहानियों वाले चार कथा संग्रह अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त और अन्वेषण, निर्वासन उपन्यास के लेखक, हिंदी के यशस्वी कथाकार "अखिलेख" को 'आनं... Read More...

पागलों ने दुनिया बदल दी: कहानी (रमेश उपाध्याय)

घोर अँधेरे वक़्त की हताशाओं के बीच, संवेदनशील इंसानी धरती की आशाओं के सपने संजोने को, आसान है कि दिवास्वप्न देखना कह दिया जाय किन्तु उजाले की उम्मीदों के यही सपने ही तो हैं जो इंसान को अँधेरे के खिलाफ खड़े रहने औ... Read More...

मुआवज़ा : कहानी (फरीदा ज़माल)

निसंदेह आतंकी या साम्प्रदायिक घटनाओं में जान गवांने वाले निर्दोष लोगों के परिवारों की इन घटनाओं के बाद की स्थितियां बेहद हृदय विदारक और अपूर्णीय होती हैं, लेकिन वहीँ वर्ग विशेष के लिए राजनैतिक हित स्वार्थों के ... Read More...

जस्‍ट डांस: कहानी (कैलाश वानखेड़े)

राजेन्द्र यादव कथा सम्मान २०१७  पाने वाली 'कैलाश वानखेड़े की कहानी "जस्ट डांस" विस्तार लिए महज़ एक कथा शिल्प न होकर वर्तमान वक़्त के सघन जाले से झांकती, विद्रोह से तपती, दमित  दलित आदिवासी आँखें हैं जो सचेतन वर्तम... Read More...

आवाज दे कहां है…!: कहानी (गीताश्री)

वह अपने डर को काबू में रखने की कोशिश करती पर किशोर मन में जो डर की नींव पड़ी थी, उस पर इतनी बड़ी इमारत बन चुकी थी कि वह चाह कर भी उसे गिरा नहीं सकती थी. उसे गिराने के लिए साहस की सुनामी चाहिए थी, जो हो नहीं सकती ... Read More...

मर्द नहीं रोते: कहानी (सूरज प्रकाश)

उन्‍होंने क्‍लर्क के हाथ से फार्म ले लिया है और बड़े बेमन से भर कर वापिस क्‍लर्क की डेस्‍क पर रख दिया है। तब तक क्‍लर्क वापिस आ गया है और फार्म देख रहा है। फार्म देख कर क्‍लर्क बेचैन हो गया है - ये क्‍या? यहा... Read More...

तीसमार खाँ: कहानी (प्रो० विजय शर्मा)

विभिन्न कलाओं का उदगम श्रोत 'साहित्य' कभी मानव सभ्यता का इतिहास बनता प्रस्तुत हुआ तो कभी सामाजिक यथार्थ के सरल किस्सा गो के रूप नज़र आया तो गंभीर चुहल के लिए सामाजिक, राजनैतिक विषमताओं पर व्यंग्य बाण छोड़ने में भ... Read More...

चाँद के पार एक चाभी: कहानी (अवधेश प्रीत)

'अवधेश प्रीत' अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को बहुत ही मार्मिक रूप में प्रस्तुत करते हैं. उनकी कहानियों में सिर्फ विमर्श ही नहीं होता है बल्कि भूत, भविष्य के साथ-साथ वर्तमान का भी एक प्रतिरूप नज़र आता है. उ... Read More...

एक छोटा-सा मजाक: कहानी (अन्तोन चेखव)

मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी 'अंतोन चेख़व' की कहानियों की वह ताकत है कि कथा पाठक से जुड़ती नहीं बल्कि ह्रदय की अनंत गहराइयों में उतरती जाती है ...... ऐसी ही एक कहानी ...| - संपादक ... Read More...