पागलों ने दुनिया बदल दी: कहानी (रमेश उपाध्याय)

घोर अँधेरे वक़्त की हताशाओं के बीच, संवेदनशील इंसानी धरती की आशाओं के सपने संजोने को, आसान है कि दिवास्वप्न देखना कह दिया जाय किन्तु उजाले की उम्मीदों के यही सपने ही तो हैं जो इंसान को अँधेरे के खिलाफ खड़े रहने औ... Read More...

मुआवज़ा : कहानी (फरीदा ज़माल)

निसंदेह आतंकी या साम्प्रदायिक घटनाओं में जान गवांने वाले निर्दोष लोगों के परिवारों की इन घटनाओं के बाद की स्थितियां बेहद हृदय विदारक और अपूर्णीय होती हैं, लेकिन वहीँ वर्ग विशेष के लिए राजनैतिक हित स्वार्थों के ... Read More...

जस्‍ट डांस: कहानी (कैलाश वानखेड़े)

राजेन्द्र यादव कथा सम्मान २०१७  पाने वाली 'कैलाश वानखेड़े की कहानी "जस्ट डांस" विस्तार लिए महज़ एक कथा शिल्प न होकर वर्तमान वक़्त के सघन जाले से झांकती, विद्रोह से तपती, दमित  दलित आदिवासी आँखें हैं जो सचेतन वर्तम... Read More...

आवाज दे कहां है…!: कहानी (गीताश्री)

वह अपने डर को काबू में रखने की कोशिश करती पर किशोर मन में जो डर की नींव पड़ी थी, उस पर इतनी बड़ी इमारत बन चुकी थी कि वह चाह कर भी उसे गिरा नहीं सकती थी. उसे गिराने के लिए साहस की सुनामी चाहिए थी, जो हो नहीं सकती ... Read More...

मर्द नहीं रोते: कहानी (सूरज प्रकाश)

उन्‍होंने क्‍लर्क के हाथ से फार्म ले लिया है और बड़े बेमन से भर कर वापिस क्‍लर्क की डेस्‍क पर रख दिया है। तब तक क्‍लर्क वापिस आ गया है और फार्म देख रहा है। फार्म देख कर क्‍लर्क बेचैन हो गया है - ये क्‍या? यहा... Read More...

तीसमार खाँ: कहानी (प्रो० विजय शर्मा)

विभिन्न कलाओं का उदगम श्रोत 'साहित्य' कभी मानव सभ्यता का इतिहास बनता प्रस्तुत हुआ तो कभी सामाजिक यथार्थ के सरल किस्सा गो के रूप नज़र आया तो गंभीर चुहल के लिए सामाजिक, राजनैतिक विषमताओं पर व्यंग्य बाण छोड़ने में भ... Read More...

चाँद के पार एक चाभी: कहानी (अवधेश प्रीत)

'अवधेश प्रीत' अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को बहुत ही मार्मिक रूप में प्रस्तुत करते हैं. उनकी कहानियों में सिर्फ विमर्श ही नहीं होता है बल्कि भूत, भविष्य के साथ-साथ वर्तमान का भी एक प्रतिरूप नज़र आता है. उ... Read More...

एक छोटा-सा मजाक: कहानी (अन्तोन चेखव)

मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी 'अंतोन चेख़व' की कहानियों की वह ताकत है कि कथा पाठक से जुड़ती नहीं बल्कि ह्रदय की अनंत गहराइयों में उतरती जाती है ...... ऐसी ही एक कहानी ...| - संपादक ... Read More...

मुर्दाखोर : कहानी (नंदलाल भारती)

('डॉ. नन्दलाल भारती' लघुकथाओं के ख्यातिलब्ध एक दलित चिन्तक और लेखक हैं | हिंदी की तमाम विधाओं पर काम करते हुए अपनी बात पाठकों तक पहुंचाते हैं...मुर्दाखोर दलित समाज की विसंगति और संघर्ष की विजय गाथा सी, कविता के... Read More...

परास्त: कहानी (धनंजय सिंह)

‘नहीं...नहीं साब। हम हाथ जोड़ता। हमको नई जाना। फिफ्टीन इयर में नायक का रैंक मिला है। एक बार सिक क्वार्टर चला गया तो रैंक चला जाएगा।’ डी.एस.सी. के मरीज गार्ड ने अपनी यूनीफॉर्म की कमीज में हाल ही में लगे नायक के र... Read More...