परास्त: कहानी (धनंजय सिंह)

‘नहीं...नहीं साब। हम हाथ जोड़ता। हमको नई जाना। फिफ्टीन इयर में नायक का रैंक मिला है। एक बार सिक क्वार्टर चला गया तो रैंक चला जाएगा।’ डी.एस.सी. के मरीज गार्ड ने अपनी यूनीफॉर्म की कमीज में हाल ही में लगे नायक के र... Read More...

परसाई का मुँह काला कर दिया जाता……: आलेख (हफीज़ किदवई)

परसाई की कलम बिलकुल घिसीपिटी नही थी। उसमे एक चमक थी। धार थी। जो किसी भी बुराई को काटने की ताक़त रखती। कविता, कहानी, उपन्यास, लेख सबमे परसाई ने खूब काम किया। अपने आखरी दिनों तक वह सिर्फ और सिर्फ लिखते रहे। वह भी ... Read More...

मंगू का हिस्सा : कहानी (शक्ति प्रकाश )

अपने समय के यथार्थ घटनाक्रमों की जटिलताओं को तोड़कर सहज रचनात्मकता के साथ उतरना किसी भी रचना की पहली प्राथमिकता है | शक्ति प्रकाश की कहानियाँ, जीवन में साँसों की मानिंद महत्त्व रखती सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक घ... Read More...

हिम्मत न हारना, मेरे बच्चो!: कहानी (मैक्सिम गोर्की)

पुरानी हड्डियों को ऐसे सीधा करने के बाद वह दरवाज़े के निकट एक पत्थर पर बैठा जाता है, जाकेट की जेब से एक पोस्टकार्ड निकालता है, पोस्टकार्ड थामे हुए हाथ को आँखों से दूर हटाता है, आँखें सिकोड़ लेता है और कुछ कहे बिन... Read More...

एक कमज़ोर लड़की की कहानी: कहानी (सूरज प्रकाश)

उस दिन की बात वहीं खत्‍म हो गयी थी। बाद में बेशक कई बार फेसबुक पर उनकी हरी बत्‍ती उनके मौजूद होने का संकेत दे रही थी लेकिन मैंने कभी अपनी तरफ से पहल करके उन्‍हें डिस्‍टर्ब नहीं किया था। कभी करता भी नहीं। किसी क... Read More...

बिहार वाली बस : लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

"ले, अब मर. कितनी बार कह चुका हूं. बस में सारे बच्चे लेकर मत चलाकर. साला किधर –किधर इस भीड़ में उसे खोजूं. पांच दफा तो आवाज लगा चुका... पर कमीना जो ठहरा – एक चूं की आवाज उससे देते नहीं बन रहा." एक चुप्पी के बाद... Read More...

गोजर: कहानी (प्रो० विजय शर्मा)

यूं तो कहानी बहुत पहले लिखी गई .... लेकिन आज पढ़ते हुए लगता है जैसे हम सब पूरा समाज असहाय गोजर (कांतर) बनता जा रहा है और ऊपर रखी अनचाही ईंट का वज़न लगातार बढ़ रहा है ....... ' विजय शर्मा' की कहानी  गोजर  विजय... Read More...

महापंचायत…: कहानी (अभिषेक प्रकाश)

अभिषेक की कलम खासकर साहित्यिक विधा के तौर पर पूर्व नियोजित होकर लिखने की आदी  नहीं है | हाँ बस वे मानव जीवन की घटना परिघटनाओं पर वौद्धिक क्रिया-या प्रतिक्रिया पर अपनी कलम न घसीटकर, अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति को उ... Read More...

एक रचनाकार को उसकी रचनाएं जीवित रखती हैं पुरस्कार नहीं: हृषिकेश सुलभ

एक रचनाकार को उसकी रचनाएं जीवित रखती हैं पुरस्कार नहीं:  15 फरवरी 1955 को बिहार के सीवान जिले के लहेजी ग्राम में स्वतंत्रता सेनानी रमाशंकर श्रीवास्तव के आंगन में एक बच्चे का जन्म हुआ जो अपनी प्रारंभिक पढाई के ... Read More...

कहना सुनना: कहानी हिंदी में (कुमार अम्बुज) ( kahani in hindi )

मानवीय रिश्तों की गर्माहट को भेदती छद्म आज़ादी से होकर किसी बारीक रेशे की तरह गुजरती जिंदगी के बेहद सूक्ष्म कणों को पकड़ने, जोड़ने का प्रयास करती कवि 'कुमार अम्बुज' की यह कहानी .....| - संपादक  कहना सुनना  कु... Read More...