कहना सुनना: कहानी हिंदी में (कुमार अम्बुज) ( kahani in hindi )

मानवीय रिश्तों की गर्माहट को भेदती छद्म आज़ादी से होकर किसी बारीक रेशे की तरह गुजरती जिंदगी के बेहद सूक्ष्म कणों को पकड़ने, जोड़ने का प्रयास करती कवि 'कुमार अम्बुज' की यह कहानी .....| - संपादक  कहना सुनना  कु... Read More...

फेसबुक: नाटक (अनीता चौधरी)

अनीता चौधरी की कलम कविता, कहानी, नाटक जैसी साहित्य की महत्वपूर्ण विधाओं पर सक्रिय है इस कड़ी में आपका एक बाल नाटक ....|  फेसबुक  अनीता चौधरी दृश्य – 1 (घर का दृश्य, शाम का समय है | पिताजी ऑफिस से आते है औ... Read More...

वारिस: कहानी (प्रो० विजय शर्मा)

"एक बार के हुए दंगों ने जब उन्हें जड़ से उखाड़ दिया तो वे आकर इस मोहल्ले में बस गए। दंगों में उन्हीं जैसे गरीब लोगों का नुकसान हुआ था। उन्हीं जैसे गरीब लोगों के घर में आग लगी थी। उन्हीं जैसे गरीब लोग मारे गए थे। ... Read More...

ड्रामा क्वीन: कहानी (अनीता मिश्रा) kahani in hindi

"सरिता ने हाथ की रस्सी को झटक कर फेंका और घूरकर लखन को देखने लगी। वह इतनी कसकर हिचकी लेकर रो रही थी कि उससे कुछ बोला नहीं जा रहा था। सास ने लानत भरी आवाज में कहा, ‘’दुल्हिन ! तुम दुई कौड़ी की निकली। अरे, धीरे –ध... Read More...

खो जाते हैं घर : कहानी (सूरज प्रकाश)

यथार्थ से जूझती बेहद मार्मिक और संवेदनशील कहानी ..... वरिष्ठ साहित्यकार सूरज प्रकाश की कलम से ...| खो जाते हैं घर सूरज प्रकाश बब्बू क्लिनिक से रिलीव हो गया है और मिसेज राय उसे अपने साथ ले जा रही हैं। उन्हों... Read More...

उस रात : लघु कथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

लघु कहानी के नए हस्ताक्षर के रूप में उभरते 'सुशील कुमार भारद्वाज' की कलम से मानवीय अंतरद्वंद को उकेरती उनकी अगली लघुकथा हमरंग के मंच से आप सब के बीच ........| - संपादक  उस रात उस रात दिल और दिमाग दोनों में ... Read More...

मैं भी आती हूं ….! कहानी (हनीफ मदार)

वर्तमान समय की  उपभोगातावादी व्यवस्था के कारण  हरी भरी भूमि और  पेड़ों को काटकर ईट पत्थर की चन्द दीवारों द्वारा बने मकानों के दर्द को बयाँ करती है  हनीफ मदार की कहानी  ' मैं भी आती हूँ ..... ' जिसमें धर्म के आगे... Read More...

जिन दिनों: कहानी (संजीव चंदन)

दुनिया की प्रगतिशील चेतना के अग्रणी संवाहक वर्ग को केंद्र में रखकर बुनी गई 'संजीव चंदन' की यह कहानी आधुनिक समय और समाज का एक नया विमर्श रचती है | प्रस्तुति का अनूठापन कहानी विस्तार पर भारी है जो  इस कहानी को मह... Read More...

अमृतसर टू कनेडा : लघुकहानी (अमिता महरौलिया)

‘‘मुंडा सिंगापुर दा है ओथे ही एक छोटा जिहालया होया है। मुंडा जाट्ट है, मैं देख लिया है तुसी बस हां करो जी!’’ मनप्रीत लस्सी का गिलास रखते बोली... ‘‘जी गीत ता एकदम गां वरगी है। बस तुसी भी हां करो जी।’’ ...अरे भ... Read More...
(हनीफ मदार)

ऐसे में लेखक बेचारा करे भी क्या…?: संपादकीय (हनीफ मदार)

ऐसे में लेखक बेचारा करे भी क्या...?  हनीफ मदार इधर हम छियासठवें गणतंत्र में प्रवेश कर रहे हैं | अंकों के लिहाज़ से इस गणतंत्र वर्ष के शुरूआत 1 जनवरी २०१६ से पूरे हफ्ते हमरंग पर एक भी पोस्ट या रचना प्रकाशित नह... Read More...