पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं : व्यंग्य (आरिफा एविस)

सरकार तो आती जाती है आज ये है कल वो थी. लेकिन देश का विकास कभी नहीं रुकता क्योंकि सरकार और कम्पनी में अच्छा गठजोड़ है. ये तो देश की सेवा या लोगों की सेवा बड़ी मुस्तैदी और ईमानदारी से कर रहे थे. 2 साल के प्रोजेक्ट... Read More...

जन-गण-मन: एवं अन्य कविताएँ (विद्रोही)

3 जनवरी 1957 को फिरोज़पुर (सुल्तानपुर) उत्तरप्रदेश में जन्मे, रमाशंकर यादव 'विद्रोही' हमारे बीच नहीं रहे ... जैसे जे एन यू खाली हो गया है... जैसे फक्कड़ बादशाहों की दिल्ली खाली हो गयी है !! उनका बेपरवाह अंदाज़, फ... Read More...

सुसाइड नोट: ‘बस मरना ही हमारे हिस्से है.. (विनय सुल्तान)

सुसाइड नोट: ‘बस मरना ही हमारे हिस्से है.. साभार गूगल (तीसरी क़िस्त) हमारे जेहन में हर शब्द के साथ एक या अधिक छवियां जुड़ी होती हैं. मसलन बुंदेलखंड नाम सुनते ही लक्ष्मी बाई, फूलन देवी, ददुआ, मोड़ा-मोड़ी, चंद्रपाल-द... Read More...

शो मस्ट गो ऑन, ‘सुखिया मर गया भूख से’: रिपोर्ट (अनीता चौधरी)

शो मस्ट गो ऑन, 'सुखिया मर गया भूख से' अनीता चौधरी शौकिया रंगमंच का विस्तार हो रहा है! पर वो अपने आप को संकटग्रस्त पाता है। वजह।?...उसे कम खर्च और सशक्त कथ्य के ताज़े नाटक चाहिए होते हैं नाटककार, रंगकर्मी जन ... Read More...

जब तक मैं भूख ते मुक्त नाय है जाँगो…. : नाट्य समीक्षा (हनीफ मदार)

13 व् 14 जून को मथुरा में दो दिवसीय नाट्य आयोजन में मंचित हुए 'राजेश कुमार' के नाटक "सुखिया मर गया भूख से" की मंचीय प्रस्तुति पर 'हमरंग' के संपादक "हनीफ मदार" का समीक्षालेख......| - अनीता चौधरी  जब तक मैं भू... Read More...