मुआवज़ा : कहानी (फरीदा ज़माल)

निसंदेह आतंकी या साम्प्रदायिक घटनाओं में जान गवांने वाले निर्दोष लोगों के परिवारों की इन घटनाओं के बाद की स्थितियां बेहद हृदय विदारक और अपूर्णीय होती हैं, लेकिन वहीँ वर्ग विशेष के लिए राजनैतिक हित स्वार्थों के ... Read More...

डकार की दरकार: व्यंग्य (डॉ० कर्मानंद आर्य)

‘डकार’ पर जांच कराना टेढ़ी खीर है. जांच का शिरा हर सरकार से जुड़ता है इसलिए ‘सरकार’ इससे बच रही है. इतिहास कहता है कि एक विशाल प्रदेश का मुख्यमंत्री भी यह नहीं समझ पाया कि गरीब के पेट को कितना चारा चाहिए? कई बार ... Read More...

जिंदा रहना हर आदमी का अधिकार है: आलेख (एस तौहीद शाहवाज़)

"देश की एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी काट रही, फुटपाथ के लोगों की तक़दीर पहले से कोई बहुत ज्यादा नहीं बदली। हाशिए के लोगों के हांथ अब भी खाली हैं । महंगाई, भ्रष्टाचार व कालाबाजार का ताप सबसे ज्यादा निच... Read More...