‘गांधी ने कहा था’: नाट्य समीक्षा (एस तौहीद शहबाज़)

साम्प्रदायिकता का ख़बर बन जाना ख़तरनाक नहीं है, ख़तरनाक है ख़बरों का साम्प्रदायिक बन जाना। देश में विभिन्न समुदायों में तमाम तनावों और असहज हालातों के बीच राजेश कुमार का नाटक ‘गांधी ने कहा था’ हमेशा प्रासंगिक र... Read More...