भारत को चाहिए जादूगर और साधु: व्यंग्य (हरिशंकर परसाई)

"इस पूरे साल में मैंने दो चीजें देखीं। दो तरह के लोग बढ़े - जादूगर और साधु बढ़े। मेरा अंदाज था, सामान्य आदमी के जीवन के सुभीते बढ़ेंगे - मगर नहीं। बढ़े तो जादूगर और साधु-योगी। कभी-कभी सोचता हूँ कि क्या ये जादूग... Read More...

मउगा: कहानी (कमलेश)

हमारी परम्पराएं जाती धर्म ताकत सभी एक साथ प्यार पर पैहरा बैठाने के या प्यार का गला घोंट देने की कोशिश में इंसानों का ही खून बहाते रहे हैं | प्यार तो इंसानी रूह और आस्था के भगवान की तरह जाति, धर्म, परम्परा और तम... Read More...