‘दीबा नियाज़ी’ की कविताएँ॰॰॰

अतृप्त मानवीय इच्छाओं के ऊपर बेहतर ज़िंदगी का भ्रमित आवरण बुनते सुकोमल सपने दिखा कर, इंसानी जज़्बातों से खेलते हुए उन्हें अपने क़ब्ज़े में कर, इस्तेमाल की वस्तु बना लेने की सरल प्रक्रिया का, वर्तमान तकनीकी समय ... Read More...

मुट्ठी भर धूप : कविताएं (अमृता ठाकुर)

धूसर समय की विद्रूपताओं को देखती, समझती और मूर्त रूप में मानवीय कोमलता के साथ संघर्षशील स्त्री के समूचे वजूद का एहसास कराती दो कवितायें .....| सम्पादक  मुट्ठी भर धूप  अमृता ठाकुर घुप्प अंधेरा,कभी बेहद र... Read More...

एक मोर्चा एवं अन्य कवितायें : जिजीविषा रजनी

शब्द और संवेदनाओं के सम्मलित एहसास से गुथी जिजीविषा रजनी की कविताएँ सहज ही मानवीय अन्तःकरण में इंसानी उद्वेग को झकझोरती सी प्रतीत होती हैं | जैसे खड़े हैं कुछ सवाल खुद जवाब बनकर .....| - संपादक  एक मोर्चा ज... Read More...

आज की लड़की, एवं अन्य कविताएँ: (सुलोचना खुराना)

इंसानी ज़ज्बात जब खुद व खुद शब्द ग्रहण कर मानवीय अभिव्यक्ति बनकर फूटते हैं, निसंकोच ऐसी रचनाएं मन के बेहद करीब से गुजरती हैं | कुछ ऐसा ही सुखद एहसास देती हैं 'सुलोचना खुराना' की यह कवितायें .... | - संपादक  आज ... Read More...