मुट्ठी भर धूप : कविताएं (अमृता ठाकुर)

धूसर समय की विद्रूपताओं को देखती, समझती और मूर्त रूप में मानवीय कोमलता के साथ संघर्षशील स्त्री के समूचे वजूद का एहसास कराती दो कवितायें .....| सम्पादक  मुट्ठी भर धूप  अमृता ठाकुर घुप्प अंधेरा,कभी बेहद र... Read More...

एक मोर्चा एवं अन्य कवितायें : जिजीविषा रजनी

शब्द और संवेदनाओं के सम्मलित एहसास से गुथी जिजीविषा रजनी की कविताएँ सहज ही मानवीय अन्तःकरण में इंसानी उद्वेग को झकझोरती सी प्रतीत होती हैं | जैसे खड़े हैं कुछ सवाल खुद जवाब बनकर .....| - संपादक  एक मोर्चा ज... Read More...

आज की लड़की, एवं अन्य कविताएँ: (सुलोचना खुराना)

इंसानी ज़ज्बात जब खुद व खुद शब्द ग्रहण कर मानवीय अभिव्यक्ति बनकर फूटते हैं, निसंकोच ऐसी रचनाएं मन के बेहद करीब से गुजरती हैं | कुछ ऐसा ही सुखद एहसास देती हैं 'सुलोचना खुराना' की यह कवितायें .... | - संपादक  आज ... Read More...