‘चाँद की आँखों में’ एवं अन्य कवितायें : (तरसेम कौर)

जीविका की जद्दो-जहद में  लगातार क्षीण होती हमारी संवेदनाएं , अपना जीना भूलकर दूसरों के  जीवन को ही अपना जीना समझने की स्त्री मन की कोमलता, प्राकृतिक और वास्तविक रंगों के साथ जिन्दगी की कला को समझने की कोशिश करत... Read More...