लोकतंत्र बचेगा तभी हम बचेंगे: (डॉ० नमिता सिंह)

ये समझा जाता रहा है कि पत्रकार जनता की धड़कन पहचानते हैं और उसे शब्द देते हैं। वे एक प्रकार से जनता के प्रतिनिधि बन कर सत्ता और समाज के बीच सेतु होते हैं और इसीलिये लोकतंत्र के तीन अंगों विधायिका, कार्यपालिका और... Read More...

साहित्य में स्त्राी सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ, “भाग १” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

आज स्त्री-लेखन साहित्यिक चर्चा में एक मुख्य विषय है। समकालीन स्त्री रचनाकारों ने ऐतिहासिक-सामाजिक विकास क्रम की स्थितियों में बड़ी सीमा तक संविधान-प्रदत्त बराबरी के अधिकारों का उपयोग करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतं... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग २” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"आधुनिक ज्ञान एक शक्ति है। उससे लैस होकर पुरुष खुद को शक्तिशाली बनाना चाहते थे, और स्त्रियों को कमज़ोर ही रखना चाहते थे। अपने इस स्वार्थ को पुरुष सुधारकों ने राष्ट्रवाद के सिद्धांत के आवरण में पेश किया कि ब्रिटि... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग ३” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध और बीसवीं सदी के पूर्वाद्ध की अवधि में जिन भारतीय महिलाओं ने अपनी मेधा, विद्वत्ता और सामाजिक क्षेत्र में आंदोलनकारी व्यक्तित्व से समाज के बड़े हिस्से को प्रभावित किया तथा स्त्री स्वात... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग 5” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"डॉ रशीद जहाँ वैचारिक रूप से समृद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता भी थीं और अपने वामपंथी पति महमूद ज़फर के साथ सभी राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों में सहयोग करती थीं। 1936 में जब प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना हुई और लखनऊ में ... Read More...

पत्रकारिता के अब उद्देश्य बदल गये हैं !: आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

आज व्यवसायिकता समाज और राजनीति की आधारशिला है। आज़ादी मिलने के बाद भी प्रमुख अख़बार और पत्रिकाएँ बड़े व्यापारिक संस्थानों से जुड़ी थीं लेकिन उनके लेखक-संपादक-स्तंभकारों को पर्याप्त वैचारिक स्वतंत्रता थी। वे जन-विर... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आलेख ‘छटवीं क़िस्त’ (डॉ0 नमिता सिंह)

'स्त्री देह आज हाई टेक्नोलॉजी के माध्यम से विभिन्न तरीकों से मनोरंजन के साधन के रूप में उपलब्ध हो रही है। स्त्रीदेह का वस्तुकरण पुरानी मान्यताओं, नैतिकता के मानदंडों को ध्वस्त कर हर क्षेत्र में स्थापित हो रहा ह... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आलेख ‘पांचवीं क़िस्त’ (डॉ0 नमिता सिंह)

दरअसल मार्क्स ने वर्गीय आधार पर आधुनिक समाज में स्त्रियों के शोषण और उनकी निम्नतर स्थितियों के लिये बड़ी सीमा तक पूंजीवादी व्यवस्था को जिम्मेदार समझते हुए कहा कि स्त्रियों का संघर्ष चाहे वह परिवार में हो या कार... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आलेख ‘चौथी क़िस्त’ (डॉ0 नमिता सिंह)

1949 में फ्रांस की प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता सिमोन द बुआ ने ‘सेकिंड सेक्स’ पुस्तक लिखी। इसमें अपने मित्र अस्तित्ववादी फ्रांसीसी लेखक-चिंतक ज्याँ पाल सात्र से सहमत होते हुए स्त्रीवाद-अस्तित्ववाद के प... Read More...

विदेशी पूंजी निवेश की अनियंत्रित बाढ़ (डब्ल्यू. टी. ओ.) (डॉ0 नमिता सिंह)

'आज़ादी के बाद अपने देश के सुयोग्य वैज्ञानिकों और नयी खोजों में लगी प्रतिभाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में नयी तकनीकों का निर्माण कर अपने बलबूते रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में दुनिया के आगे अपने कारनामे प्रस्त... Read More...