सामाजिक परिवर्तन के अंतर्द्वंदऔर आधा गाँव: शोध आलेख

प्रयोगधर्मी साहित्यकार राही मासूम रजा़ ने अपनी लेखनी द्वारा बदलते सामाजिक परिवेश को बहुत ही सूक्ष्मता से शब्दबद्ध किया है। आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व सन् 1966 में लिखा गया ‘आधा गाँव’ उपन्यास राही की प्रतिनिधि रचना... Read More...

दलित विमर्श की वैचारिकी का घोषणा पत्र: समीक्षा (विनोद विश्वकर्मा)

"आजादी के लगभग 75 वर्षों बाद भी दलितों का मंदिर में प्रवेश, दलितों का देशभर में नंगा घुमाया जाना , दलित का छुआछूत के आधार पर बहिष्कार, दलितों की बेटी - धन सम्पत्ति कों अपनाना, क्यों बंद नही हुआ है; और यदि बंद न... Read More...