पागलों ने दुनिया बदल दी: कहानी (रमेश उपाध्याय)

घोर अँधेरे वक़्त की हताशाओं के बीच, संवेदनशील इंसानी धरती की आशाओं के सपने संजोने को, आसान है कि दिवास्वप्न देखना कह दिया जाय किन्तु उजाले की उम्मीदों के यही सपने ही तो हैं जो इंसान को अँधेरे के खिलाफ खड़े रहने औ... Read More...

यादें.. एवं अन्य कवितायें : निवेदिता

जीवन के एकांत, भावुकताओं, टूटते बिखरते और फिर-फिर जुड़ते मानवीय दर्प के बीच से धड़कती संवेदनाओं के साथ गुज़रती हैं 'निवेदिता' की कवितायें | भावुक प्रेमिका, संवेदनशील माँ, अपने समय से संघर्ष करती आधुनिक स्त्री और प... Read More...

दुनिया बदल गई: कविता (अनीश कुमार)

क्रूर भूख के अट्टाहास के बीच रोटी के लिए मानवीय संघर्षों के रास्ते इंसानी बेवशी को बयाँ करतीं 'अनीश कुमार' की दो कवितायेँ ....... दुनिया बदल गई  अनीश कुमार काली रात के अतल गहराइयों में टिमटिमाता छोटा ... Read More...