‘पद यात्रा,‘पद’ और ‘अंतिम यात्रा: व्यंग्य (देवेन्द्र सिंह सिसौदिया)

व्यंग्यकार की दृष्टि खुद से लेकर अपने आस-पास, सामाजिक और राजनैतिक क्रिया कलापों और घटनाओं,  जो आम तौर पर सामान्य घटनाओं की तरह ही दिखाती हैं, उनमें से भी बेहतर सामाजिक सरोकारों के लिए सार्थक तर्क खोज ही लेतीं ह... Read More...