घंटा बुद्धिजीवी : व्यंग्य (अनीता मिश्रा )

"अगर कोई स्त्री इन्हें गलती से भी पोजिटिव रिस्पोंस दे देती है तो इनके मन में मंदिर की सामूहिक आरती के समय बजने वाले हजारों घंटे बजने लगते हैं . ये उसको समझाते हैं कि नारी मुक्ति का रास्ता देह से होकर जाता है इस... Read More...

‘सीमा आरिफ’ की कवितायें

प्रेम के सूक्ष्म एहसासों और जीवन कि तरह ज़िंदा यादों के फाहों से मानवीय संवेदना कि परतों को बिना आवाज़ खोलने का प्रयास करतीं ‘सीमा आरिफ‘ की  कविताएँ ………..| – संपादक  १- <img... Read More...