यह नया साल: एवं अन्य कवितायेँ (अनुपम सिंह)

जहाँ एक तरफ नए साल के स्वागत के में पार्टियों और शोर-शराबों का आवेग है वहीँ वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक बदलाव के बीच किसी कलैंडर की तरह बदलते और गुजरते वर्षों को युवा पीढ़ी खुद के भीतर बढती हताशा के रूप में देखन... Read More...