‘इंसान हैं’ : पुस्तक समीक्षा (अरुण श्री)

आजकल एक आम धारणा है कि जिसके हाथ में झंडा है और जिसके जुबान पर नारे हैं उसी का वैचारिक पक्ष सशक्त है । लेकिन लेखक ने ऐसे झंडाबरदारों को नहीं बल्कि उन्हें नायक कहा है जो झंडे और नारे की राजनीती से अलग जमीन पर गु... Read More...