मर्द नहीं रोते: कहानी (सूरज प्रकाश)

उन्‍होंने क्‍लर्क के हाथ से फार्म ले लिया है और बड़े बेमन से भर कर वापिस क्‍लर्क की डेस्‍क पर रख दिया है। तब तक क्‍लर्क वापिस आ गया है और फार्म देख रहा है। फार्म देख कर क्‍लर्क बेचैन हो गया है - ये क्‍या? यहा... Read More...

सामाजिक व्यवस्था का केन्द्र परिवार: आलेख (आशीष मिश्र)

सृजन और सृजनात्मकता की सार्थकता इससे और भी बढ़ जाती है जब पाठक उसे पढ़ते हुए लेखकीय परिकल्पना से एक कदम आगे जा कर उसे सोचने, समझने और मूल्यांकन करने को विवश होने लगता है, कुछ इसी तरह 'देवी प्रसाद मिश्र' की कविता ... Read More...

…और फिर परिवार: कहानी (मज्कूर आलम)

मज़्कूर आलम की कहानी 'और फिर परिवार' एक बेहद मजबूर, बेबस और लाचार लड़की की त्रासदी लगी, जो खुद को विकल्पहीन महसूस कर आत्महत्या कर लेती है, लेकिन पुनर्पाठ में लगा कि कई बार स्थितियां आपसे बलिदान मांगती हैं। रतिका... Read More...

महिला लेखन की वर्तमान पीढ़ी: स्त्री लेखन, एक पुनर्पाठ: समीक्षालेख (संजीव चंदन)

हिंदी की पांच महिला रचनाकारों की कहानियों को पढ़ना और उनके आधार पर युवा पीढ़ी के लेखन के केंद्रीय स्वर और सरोकार को समझना   एक तुलनात्मक आधारभूमि पर सम्भव हो सका है और सुकूनदाई  भी है कि हिंदी की रचनाकार 'स्त्रीव... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आलेख (डॉ0 नमिता सिंह)

"आदिम समाज से लेकर कबीले या गण समूहों में मातृसत्तात्मक समाज ही था और वंश अथवा संतान की पहचान माता के रूप में होती थी। आदिम समाज के स्वच्छंद यौन संबंध हों या सामाजिक विकास का यह कबीलाई रूप हो जहां एक गण के पुरु... Read More...