स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आलेख ‘तीसरी क़िस्त’ (डॉ0 नमिता सिंह)

सुसंगठित रूप में स्त्री अधिकारों के लिये आंदोलन उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध और बीसवीं सदी के शुरूआती दशक से ही माने जा सकते हैं। लैंगिक असमानता की पोषक सामाजिक व्यवस्था के बदलाव और स्त्री अधिकारों के लिये संघर्ष... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आलेख ‘दूसरी क़िस्त’ (डॉ0 नमिता सिंह)

स्त्रीवाद या नारीवाद या नारी विमर्श (फेमिनिज़्म) की जब बात की जाती है तो इसका तात्पर्य स्त्रियों के लिये समान अधिकार तथा उनका कानूनी संरक्षण है। प्रारंभिक चरणों में यह संघर्ष समानता और सम्मानजनक जीवन यापन के लि... Read More...