लंदन की एक रात, हिंदुस्तान का नया सबेरा: समीक्षा (जाहिद खान)

"साल 1935 में फ्रांसीसी अदीब हेनरी बारबूस की कोशिशों से पेरिस में साम्राज्यवाद, फासिज्म के बरखिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बना ‘वल्र्ड कान्फ्रेंस ऑफ़ राइटर्स फार दि डिफेन्स ऑफ़ कल्चर’, जिसे जल्दी ही पॉपूलर फ्रंट या जनम... Read More...

दो दिलचस्प उबाऊ किताबें : आलेख (उज्जवल भट्टाचार्य)

दो दिलचस्प उबाऊ किताबें  बर्लिन दीवार गिरने के बाद एक मुहावरा बन गई. अब भी इसके इस्तेमाल की कोशिश जारी है. यहां तक तो ठीक था, लेकिन पूंजीवाद की इस सनसनीख़ेज़ जीत को सैद्धांतिक आधार देना था – ऐसा आधार जिसका ... Read More...