हंगामे का संस्कार : व्यंग्य (ब्रजेश कानूनगो)

‘इस बार क्यों, सदन का चलना तो हर बार ही मुश्किल होता है. जब ये सत्ता में थे तब भी विपक्ष ने चलने नहीं दिया था. अब ये विपक्ष में हैं तो भी यही होगा, कौन सी नई बात है.’ मैंने कहा. ‘पर इस बार ललितगेट, व्यापम जैसे ... Read More...