प्रेमचंद और सिनेमा: आलेख (प्रो०विजय शर्मा)

प्रेमचंद के १३७ वें जन्मदिवस पर विशेष - (यह सिनेमा का शुरुआती दौर था। प्रेमचंद की निगाह इस विधा पर थी। तीस के दशक में उन्होंने सिनेमा पर अपनी चिंताओं को दर्ज करते हुए एक लेख ‘सिनेमा और जीवन’ लिखा। इस लेख को पढ़... Read More...

और’मुंशी’ प्रेमचंद’ बन गए: किस्सा, (सूरज प्रकाश)

31 जुलाई को कथा सम्राट प्रेमचंद की 137 वीं जयंती पर विशेष -  और'मुंशी' प्रेमचंद' बन गए   सूरज प्रकाश दुखियारों को हमदर्दी के आंसू भी कम प्यारे नहीं होते – प्रेमचंद  प्रेमचन्द (धनपतराय) (नायाब राय) (1880 - ... Read More...

बंद ए सी कमरों में झांकते होरी, धनियाँ…, संपादकीय (हनीफ मदार)

"ऐसा नहीं कि वर्तमान यथास्थिति का विरोध या प्रतिकार आज नहीं है, बल्कि ज्यादा है | एकदम राजनीतिज्ञों की तरह | कुछ हो न हो, बदले न बदले लेकिन व्यवस्थाई यथास्थिति का विरोध करके व्यक्ति सुर्ख़ियों में तो रहता ही है ... Read More...

संत कबीर और आधुनिक हिन्दी काव्य: शोध आलेख (प्रमिला देवी)

'जननायक कबीर का प्रभाव साहित्य पर आज छह सौ वर्षो के बाद भी ज्यों का त्यों देखा जा सकता है । आज जब भी धरती के किसी कोने में मानवता लहूलुहान होती है, तो झट से हमें कबीर का पढ़ाया पाठ याद आ जाता है । टैगोर और गांधी... Read More...

समय के झरोखे से हरिशंकर परसाई… आलेख

हरिशंकर परसाई केवल लेखक कभी नहीं रहे. वे लेखक के साथ-साथ एक्टिविस्ट भी थे. उनका समूचा जीवन आन्दोलनों और यूनियनों से जुड़ा रहा. आन्दोलन छात्रों के, श्रमिकों के, शिक्षकों के, लेखकों के भी. वे लेखक के रूप में अपनी... Read More...