अधेड़ औरतें एवं अन्य कवितायें, प्रमोद बेड़िया

शब्दों से स्पंदित होती संवेदना के जीवंत और सवाल पूर्ण छत्र उकेरती हुईं 'प्रमोद बेड़िया' की दो कवितायें ..... संपादक  अधेड़ औरतें प्रमोद बेड़िया अधेड़ होती लड़की के दुख कोई नहीं जानता ,देखिए न मैं भी दुख क... Read More...

स्त्री जब पुरुष के साथ…! एवं अन्य कविताएँ (सीमा आरिफ)

मशीनी सभ्यता से मानवीय रिश्तों की गर्माहट से तपती ज़मीन को खोज लाना लेखकीय जिद है जैसे जीवित किन्तु इंसानी अवशेषों का प्रमाण | कुछ ऐसी ही ज़िद है "सीमा आरिफ़" की  रचनाओं में जो भावुक स्पर्श और भ्रामक स्पंदन के बीच... Read More...

स्मृतियाँ एवं अन्य कवितायें : रूपाली सिन्हा

वर्तमान समय की भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में कुछ सुनहले पल, यादों की पोटली लिए मन के किसी कोने को थामे रहते है जब भी थकती साँसों को थोड़ा आरम की जरुरत होती हैं, यही यादें उन्हें संबल के रूप में पुनर्जीवित कर देती है |... Read More...

जो डूबा सो हुआ पार…: आलेख (अनीता मिश्रा)

''क़ैद बन जाए मुहब्बत तो मुहब्बत से निकल'', या ''ज़न्नत एक और हैं, जो मर्द के पहलू में नहीं..'' आमतौर पर लोग प्रेम के मायने बंधना या बांधना समझते हैं। लेकिन एक स्त्री और पुरुष के बीच का प्रेम फैसला लेने की एक आज... Read More...

अनीता चौधरी की तीन कविताएँ….

इंसान के दुनिया में आने के साथ ही प्रेम दुनिया में आया और भाषा के बनने के साथ ही प्रेम की रचनात्मक अभिव्यक्ति कविता भी किन्तु साहित्य में कविताई प्रेम अभिव्यक्ति करती रचनाएं इंसानी और सामाजिक सरोकारों से भी विम... Read More...

‘सीमा आरिफ’ की कवितायें

प्रेम के सूक्ष्म एहसासों और जीवन कि तरह ज़िंदा यादों के फाहों से मानवीय संवेदना कि परतों को बिना आवाज़ खोलने का प्रयास करतीं ‘सीमा आरिफ‘ की  कविताएँ ………..| – संपादक  १- <img... Read More...

छोड़छाड़ के अपने सलीम की गली… : आलेख (प्रो० विजय शर्मा)

"प्रेम क्या है? प्रेम में पड़ना क्या होता है? इसे लिख कर व्यक्त नहीं किया जा सकता है फ़िर भी युगों-युगों से प्रेम पर लिखा जाता रहा है, आगे भी लिखा जाता रहेगा। इसे जानने-समझने का एक ही तरीका है आपादमस्तक इसमें डूब... Read More...

‘सीमा आरिफ’ की पांच कवितायें: humrang

आभासी दुनिया में खोये युवाओं में ह्रास होती मानवीय संवेदना और प्रेम को तलाश करती 'सीमा आरिफ' की कवितायें |...... 1 -   सीमा आरिफ यह फेसबुक पर जन्मे मुहब्बत टाइप अफ़साने लम्बी सड़कों से तेज़ दौड़ लगाते ... Read More...

दिल के खोह से बाहर आओ प्रेम: कवितायेँ (निवेदिता)

'क्या जुल्मतों के दौर में भी गीत गाये जायेंगे....... हाँ जुल्मतों के दौर में ही गीत गाये जायेंगे' ..... प्रेम गीत, जिसका हर शब्द इंसानियत के भीतर संवेदना बनकर स्पंदन करने की क्षमता रखता हो | यूं तो निवेदिता की ... Read More...

प्रेम एवम् विद्रोह के बीच खड़े मनोहर श्याम जोशी: आलेख (आशीष जयसवाल)

सभ्यता के विकास के साथ ही प्रेम और युद्ध से सम्बन्धित किस्से कहानियां प्रचलित होने लगी थीं ! प्रेम और युद्ध मानव मन को आकर्षित करतें हैं यही कारण है की प्रेम  और युद्ध से सम्बन्धित  किस्से कहानियां आज भी लिखे ज... Read More...