‘मृगतृष्णा’ की कवितायें……

मृगतृष्णा की कविताएँ पढ़ते हुए महज़ पढ़ी नहीं जाती बल्कि मानवीय आन्तरिकता से होकर निकलती महसूस होती हैं ...... पत्नी   google से साभार आजकल उजाला होने से ठीक पहले पत्नी की आँखें देखने लगती हैं पके सावन... Read More...