शांतिनिकेतन की यात्रा : संस्मरण (बाबा मायाराम)

यहां घूमते घामते मैं सोच रहा था, क्या जरूरत थी टेगौर जैसे संभ्रांत वर्ग के व्यक्ति को जंगल में रहने की और शांतिनिकेतन की स्थापना की। इसका जवाब उनके लिखे लेखों में मिलता है। वे भारत में बाबू बनाने वाली शिक्षा से... Read More...

साइकिल की सैर : लघु कथा (बाबा मायाराम )

हर व्यक्ति के दिमाग की हार्ड डिस्क में बचपन की अनेक स्मृतियाँ अंकित होती हैं, जब भी इस बाजारी भाग दौड़ से थककर थोड़े फुर्सत के पल मिलते है तो हम उन यादों में खो जाते हैं और ये यादों हमें अन्दर ही अन्दर गुदगुदाने ... Read More...