इस युग का कमाल, पुस्तक मेले का हाल : शक्ति प्रकाश

वहां एक लेखक मंच भी था, यूँ खासा फोटोजैनिक था लेकिन सार्वजनिक शौचालय से बिलकुल लगा हुआ, कई आम आदमी जब शौचालय से निकल मंच के पास प्रकट होते तो उनका हाथ जिप पर आसानी से देखा जा सकता था। लेखक और सार्वजनिक शौचालय ए... Read More...

हमारे समय के धड़कते जीवन की कविताएं: समीक्षा (डॉ० राकेश कुमार)

इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक के मध्यांतर में प्रदीप मिश्र की कविताएं तेजी से बदलते भारतीय समाज के विविध रंगों को हमारे सामने लाते हैं। वर्तमान समय में भारतीय समाज लोकतंत्र, भूमंडलीकरण, बाज़ारवाद और निजीकरण की बड़ी ... Read More...