सुबह ऐसे आती है: कविता (निर्मल गुप्ता)

सच के धरातल पर आकार लेती मानवीय अभिव्यक्ति की एक कविता........ सुबह ऐसे आती है  पुजारी आते हैं नहा धोकर अपने अपने मंदिरों में जब रात घिरी होती है। वे जल्दी जल्दी कराते हैं अपने इष्ट देवताओं को स्नान इसके... Read More...