कलबुर्गी तुम्हारे लिए : कविता (पुलकित फिलिप)

युवा कवि 'पुलकित फिलिप' की कविताओं के रचना संसार का ज्यादा भाग आक्रोश से भरा है | यह रचनाएं गवाह हैं इस बात की कि वर्तमान युवा केवल निराशा से ही नहीं बल्कि आक्रोश से भी भर रहा है | बतौर बानगी पूँजी और पूँजीवाद ... Read More...

जीव अनन्त है, मात्र जीवनकाल ही सीमित है: “ए० के० हंगल”

अविभाजित भारत के सियालकोट (जो कि अब पाकिस्तान में है) में साल 1917 में जन्मे अवतार विनीत कृष्ण हंगल उर्फ ए. के. हंगल की शुरूआती जिंदगी, काफी हंगामेदार रही। उनका बचपन और पूरी जवानी संघर्षमय गुजरी। अपने स्कूली दि... Read More...

क्या हम भगत सिंह को जानते हैं …? संपादकीय (हनीफ मदार)

क्या हम भगत सिंह को जानते हैं ...?  हनीफ मदार ऐसे समय में जब पूंजीवादी व्यवस्थाओं के दमन से आर्थिक व सामाजिक ढांचा चरमरा रहा है जो सामाजिक राष्ट्रीय विघटन को तो जन्म दे ही रहा है साथ ही स्वार्थ और संकीर्णता ... Read More...

भगत सिंह से एक मुलाकात: आलेख (स्व० डा० कुंवरपाल सिंह)

कितने शर्म की बात है, देश के 30 करोड़ लोग आधे पेट सोते हैं। कैसी विडंबना है-दुनिया के 20 अमीर लोगों में तीन हिन्दुस्तानी हैं और दूसरी ओर योरोप के कई देशों की कुल आबादी से अधिक लेाग देश में ग़रीबी की रेखा से नीच... Read More...