“शास्त्र से संवाद” : समीक्षा (अभिषेक कुमार उपाध्याय)

प्रस्तुत पुस्तक 'नामवर के नोट्स' संपूर्ण व्याख्यान नहीं बल्कि सिर्फ नोट्स हैं जो कि स्मृति के ज्ञानात्मक आधार का साक्ष्य प्रस्तुत करती है। कुल दस अध्यायों में संकलित व्याख्यान 'संस्कृत काव्यशास्त्र के स्वरुप नि... Read More...

रंगमंच का बदलता स्वरूप: आलेख (अनीश अंकुर)

नाटक, रंगमंच समाज में जनता की आवाज़ बनकर किसी भी प्रतिरोध के रचनात्मक हस्तक्षेप की दिशा में जरूरी और ताकतवर प्रतीक के रूप में मौजूद रहा है | न केवल आज बल्कि उन्नीसवीं शताब्दी में  1857 का  प्रथम स्वाधीनता संग्रा... Read More...