भिखारी ठाकुर, उत्सुकता की अगली सीढ़ी: आलेख (अनीश अंकुर)

बिहार के सांस्कृतिक निर्माताओं में गौरवस्तंभ माने जाने वाले 'भिखारी ठाकुर' पर पिछले कुछ वर्षों कई पुस्तकें निकलीं, शोध हुए एवं कई अभी भी जारी है।  इसी कड़ी में ‘विकल्प प्रकाशन’, नई दिल्ली से अश्विनी कुमार पंकज ... Read More...

राष्ट्रगान की लय से टकराती बिदेसिया की धुन: आलेख (अनीश अंकुर)

राजनीतिक सत्ता समाज के हाशिए पर रहने वाले बहिष्कृत  तबकों केा भले ही पहचान अब मिली हो लेकिन भिखारी ठाकुर ने हमेशा अपने नाटकों के नायक इन तबकों से आने वाले चरित्रों को ही बनाया। उनके नाटकों के पात्रों केा देखने ... Read More...