‘मंटो का टाइपराइटर’: किस्से, (सूरज प्रकाश)

कृशन चंदर जब  दिल्‍ली रेडियो में थे, तभी पहले मंटो और फिर अश्‍क भी रेडियो में आ गये थे। तीनों में गाढ़ी छनती थी। चुहलबाजी और छेड़छाड़ उनकी ज़िंदगी का ज़रूरी हिस्‍सा थे। रूठना मनाना चलता रहता था। कृशन चन्दर की ए... Read More...

टिटवाल का कुत्ता: कहानी (सआदत हसन मंटो)

11 मई 1912 को पंजाब के समराला में जन्मे सआदत हसन मंटो उन विरले साहित्यकारों में शुमार हैं जिन्होंने महज़ कहानियों के बल पर ही वैश्विक पहचान हासिल की | ख़ास बात है कि मंटो की कहानियां महज़ कहानियाँ न होकर इंसानी फि... Read More...

मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ: आत्मकथ्य (मंटो)

'अगर पूछा जाए कि मैं कहानी क्यों लिखता हूँ, तो कहूँगा कि शराब की तरह कहानी लिखने की भी लत पड़ गई है। मैं कहानी न लिखूँ, तो मुझे ऐसा लगता है कि मैंने कपड़े नहीं पहने हैं या गुसल नहीं किया है या शराब नहीं पी है। दर... Read More...

टोबा टेक सिंह: ऑडियो कहानी (आवाज़ ‘यूनुस खान’)

हर वक़्त में बेहद प्रासंगिक नज़र आती भारत विभाजन पर मानवीय त्रासदी की संवेदनशील दास्तान सी  'सआदत यूनुस खान हसन मंटो' की कहानी 'टोबा टेक सिंह' को आज सुनते हैं हमरंग पर रेडियो जौकी 'यूनुस खान' की आवाज़ में .... Read More...