भाषा बहता नीर है: समीक्षा ‘कुतुबनुमा’ कविता संग्रह, (प्रदीप कांत)

अग्रज कवि सुमित्रानंदन पंत ने कहा था - वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान। निकलकर आँखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान...| यह कविता का एक कारण हो सकता है| इस कोमल भावना से थोड़ा आगे बढ़ें, व्यक्तिगत पीढा ... Read More...