अनारकली ऑफ आरा : उम्मीद अभी जिंदा है: फिल्म समीक्षा (मज्कूर आलम)

स्त्री सशक्तीकरण पर जब भी बातें होती है तो वह किताबी जुमले का शक्ल अख्तियार कर लेती है। बहस की भाषा क्लासिकी लिए होती है और वह पूरी तरह से बौद्धिक कवायद भर बन कर रह जाती है (फिल्मों में भी)। चाहे वह बात स्त्री ... Read More...

…और फिर परिवार: कहानी (मज्कूर आलम)

मज़्कूर आलम की कहानी 'और फिर परिवार' एक बेहद मजबूर, बेबस और लाचार लड़की की त्रासदी लगी, जो खुद को विकल्पहीन महसूस कर आत्महत्या कर लेती है, लेकिन पुनर्पाठ में लगा कि कई बार स्थितियां आपसे बलिदान मांगती हैं। रतिका... Read More...

‘कल्चर ऑफ साइलेंस’: संपादकीय (मज्कूर आलम)

‘कल्चर ऑफ साइलेंस’  मज्कूर आलम तमाम हंगामों और तमाशों के बीच साल 2015 समाप्त हो गया। इस बीच साहित्यिक-सांस्कृतिक-सामाजिक सारोकार की पैरोकारी के लिए बना वेबपोर्टल 'हमरंग डॉट कॉम' ने भी पिछले ही महीने अपना एक ... Read More...