एक ‘मलाल’ यह भी: आलेख (सौरभ शेखर)

"आखिर आत्म-कथाओं में ऐसा क्या होता है कि वे साहित्य ही नहीं साहित्येतर पाठकों को भी आकर्षित करती हैं. क्या दूसरों की ज़ाती ज़िन्दगी में ताक-झाँक और उससे उत्पन्न ‘विकेरिअस प्लेज़र’ इस आकर्षण के मूल में होता है? या ... Read More...